उत्तराखंडदेहरादून

उत्तराखंड में गुटखा कारोबार पर धामी सरकार का बड़ा एक्शन, पान मसाले पर एक साल की रोक…

विनय शंकर पांडेय के आदेश से तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों पर शिकंजा, निर्माण से लेकर बिक्री तक प्रतिबंध लागू करने की तैयारी; नियमों का उल्लंघन करने वालों पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई...

देहरादून। उत्तराखंड में गुटखा और पान मसाला कारोबार को लेकर सरकार की ओर से सख्त कदम उठाए जाने की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों पर नियंत्रण को लेकर कार्रवाई तेज करने का रुख अपनाया है। उत्तराखंड  में प्रतिबंधित श्रेणी के पान मसाला उत्पादों पर एक वर्ष तक रोक लगाने संबंधी आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के बाद गुटखा और पान मसाला कारोबार से जुड़े दुकानदारों, थोक विक्रेताओं तथा आपूर्तिकर्ताओं के बीच हलचल बढ़ने की संभावना है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त विनय शंकर पांडेय  आपूर्ति और बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए

यदि आदेश में उल्लिखित प्रतिबंध का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि प्रतिबंधित उत्पादों की पहचान कर नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।गुटखा और पान मसाला की बिक्री केवल छोटी दुकानों तक सीमित नहीं है। इसके कारोबार में थोक विक्रेता, वितरक, गोदाम संचालक और सप्लाई नेटवर्क भी शामिल होते हैं। ऐसे में प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर निगरानी जरूरी होगी।

प्रशासनिक स्तर पर जांच अभियान चलाए जाने की स्थिति में दुकानों, गोदामों और वितरण केंद्रों में उपलब्ध प्रतिबंधित उत्पादों की जांच की जा सकती है। अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि कहीं प्रतिबंधित सामग्री का भंडारण या वितरण दूसरे माध्यमों से तो नहीं किया जा रहा है। हालांकि, राज्य में जांच और कार्रवाई की वास्तविक स्थिति की पुष्टि आधिकारिक जानकारी से ही हो सकेगी।गुटखा और पान मसाला कारोबार में उत्पादों को अलग-अलग पैकेट में बेचने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के तहत किसी उत्पाद की पैकिंग या बिक्री का तरीका अपने आप उसे प्रतिबंध से मुक्त नहीं करता। यदि कोई उत्पाद लागू आदेश के दायरे में आता है, तो उसके संबंध में निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक होगा।इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सभी प्रकार के पान मसालों पर एक समान प्रतिबंध है या केवल निर्धारित श्रेणी के उत्पादों पर रोक लगाई गई है। इसका सही निर्धारण आदेश में दी गई शर्तों और लागू खाद्य सुरक्षा नियमों के आधार पर ही किया जा सकता है।तंबाकू और निकोटीन युक्त उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे उत्पादों पर प्रभावी नियंत्रण सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार और संबंधित विभागों के सामने चुनौती यह होगी कि प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के साथ-साथ नियमों के पालन की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाए।खासकर युवाओं को तंबाकू और निकोटीन के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए जागरूकता अभियान, दुकानों की जांच और नियमों के उल्लंघन पर उचित कार्रवाई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आदेश को सभी जिलों तक पहुंचाने और संबंधित अधिकारियों के माध्यम से कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि देहरादून समेत अन्य जिलों में खाद्य सुरक्षा विभाग किस प्रकार प्रतिबंधित उत्पादों की निगरानी करता है और नियमों का उल्लंघन मिलने पर क्या कदम उठाए जाते हैं।फिलहाल कारोबारियों और आम लोगों की नजर प्रतिबंध के दायरे, लागू शर्तों और विभागीय कार्रवाई पर टिकी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Check Also
Close
Back to top button